जंतर मंतर, जयपुर Jantar Mantar Jaipur

भारत की पांच खगोलीय वेधशालाओं में से जयपुर में स्थित सबसे बड़ा है जिसकी स्‍थापना राजा सवाई जयसिंह द्वितीय द्वारा 1738 CE में की गई थी। जयसिंह द्वितीय जयपुर के संस्थापक होने के अलावा सन् 1728 से लेकर 1734 तक आमेर के एक राजपूत राजा थे जंतर मंतर को पूरा करने में उन्हें सात साल का समय लगा। सन् 1901 में मरम्मत करके इस मशहूर वेधशाला को सन् 1948 में राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया गया। यह वेधशाला, यूनेस्‍को की विश्‍व धरोहर में शामिल की गई है।

वेधशाला के निर्माण में उत्‍तम गुणवत्‍ता वाला संगमरमर और पत्‍थर का इस्‍तेमाल किया गया है। इस वेधशाला में विभिन्न ज्यामितीय प्रकार के 13 उपकरण हैं जो दिन का स्थानीय समय, ग्रहण की भविष्यवाणी और नक्षत्रों की स्थिति बताते हैं। यह उपकरण एक सेकंड के भीतर सही माप कर सकते हैं। यहां पर राम यंत्र भी रखा है जो उस काल में ऊंचाई मापने का यंत्र या साधन हुआ करता  था। यह यंत्र, वेधशाला में अपने तरीके का अद्वितीय उपकरण है जो महाराजा की खगोलीय कौशल का प्रतिनिधित्‍व करता है।


आज के समय में जंतर मंतर के उपकरणों का इस्तेमाल मौसम की भविष्यवाणी, मौसम की अवधि, मानसून की तीव्रता और बाढ़ या अकाल की संभावनाओं के लिए किया जाता है।

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