उदयपुर में स्थित “जगदीश मंदिर”

जगदीश मंदिर उदयपुर का बड़ा ही सुन्दर,प्राचीन एवं विख्यात मंदिर है। आद्यात्मिक्ता के क्षेत्र में इसका अपना एक विशेष स्थान हैं, साथ ही मेवाड़ के इतिहास में भी इसका योगदान रहा है। यह मंदिर उदयपुर में रॉयल पैलेस के समीप ही स्थित है, यह मंदिर भारतीय-आर्य स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहण है।

इसका निर्माण महाराणा जगत सिंह ने सन् 1651 में करवाया था , उस समय उदयपुर मेवाड़ की राजधानी था। यह मंदिर लगभग 400 वर्ष पुराना है  मंदिर में प्रतिष्ठापित चार हाथ वाली विष्णु की छवि काले पत्थर से बनी है। “जगदीश” भगवान विष्णु के कई नामों में से एक नाम है और यह मंदिर भगवान विष्णु (लक्ष्मी नारायण) को समर्पित है जो उदयपुर में सबसे बड़े मंदिरों में से एक है।

जगदीश मंदिर की वास्तुकला

जगदीश मंदिर की वास्तुकला बहुत शानदार है और इसका मुख्य द्वार शहर के बरपोल से आसानी से दिखता है जो केवल 150 मीटर की दूरी पर स्थित है। इस तीन मंजिला मंदिर में पतले नक्काशीदार खम्बें, खूबसूरती से सजाई गयी छतें, रंगीन दीवारे, और आलीशान हॉल है। इस मंदिर की 79 फीट ऊंची मीनार उदयपुर का क्षितिज है। जगदीश मंदिर मुख्य मंदिर मीनार को नृतकी, हाथी, घोड़े और संगीतकारों से सजाया गया है।

मंदिर के प्रवेश द्वार सबसे पहले पत्थर से बने दो हाथी है, एक पत्थर की पट्टी पर महाराजा जगत सिंह के संदर्भ में शिलालेख हैं। मंदिर के मुख्य द्वार तक संगमरमर से 32 कदमो के निशान बने हुए है। पीतल से बनी गरुड़ की मूर्ति जो वास्तव में आधे- मनुष्य और आधे-चील की आकृति, ऐसे दर्शाती है जैसे कि वह भगवान विष्णु रक्षा कर रहे हो।

जगदीश मंदिर के अंदर चार भुजाओं वाले भगवान विष्णु की एक शानदार मूर्ति है। जो पूर्ण रूप से   काले पत्थर के टुकड़े से बनाई गई है यह मूर्ती अपने पवित्र और दिव्य रूप से  सभी को अपनी ओर आकर्षित करती है इस स्थान पर चार और छोटे मंदिर हैं जो मुख्य मंदिर के चारो ओर है। यह मंदिर भगवान गणेश, सूर्य देव, देवी शक्ति और भगवान शिव को क्रमशः समर्पित हैं।

यहाँ अन्य कलात्मक वास्तुकला हैं जो प्रसिद्ध और आकर्षक हैं जिसमे पिरामिड के सामान शिखर, मंडप (प्रार्थना कक्ष) और एक पोर्च सभी में शानदार है। मंदिर की पहली और दूसरी कहानी हर 50 स्तंभों के बारे में बताती है जिन सभी पर शानदार नक्काशी की गयी है और जो इस मंदिर के सौंदर्य को और बढ़ाते है। जगदीश मंदिर हिंदू वास्तुकला विज्ञान वास्तुशास्त्र द्वारा भी बनाया गया है|

हर साल दूर-दूर से लोग यहाँ भगवान के दर्शन करने आते है।

यात्रियों के लिए सूचना

जगदीश मंदिर समय: यह  मन्दिर 4.15 से  – 1.00 बजे तक सुबह के समय व 5.15 बजे- 8.00 बजे तक शाम और सभी दिन खुला रहता है।

कैसे पहुंचा जाए:  जगदीश मंदिर उदयपुर के सिटी पैलेस परिसर के अंदर स्थित है। जहाँ परिवहन की मदद से आसानी से पहुंचा जा सकता है। उदयपुर सड़क, रेल और वायु से भलीभांति जुड़ा हुआ है।

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