सांवलियाजी की रथयात्रा में उमड़े श्रद्धालु: हेलिकॉप्टर से हुर्ई पुष्प वर्षा, रजतरथ में बिराजित भगवान

चित्तौडग़ढ़। मेवाड़ के कृष्णधाम सांवलियाजी में तीन दिवसीय मेले के मुख्य दिवस जल झुलनी एकादशी के अवसर पर सोमवार को मण्डफिया कस्बे ने मथरा-वृंदावन का रूप ले लिया। यहां होली के रंग उड़े तथा भगवान संग जमकर फाग खेली गई। रथयात्रा में हजारो श्रद्धालु उमड़ पड़े। भगवान सांवलिया सेठ के साथ फाग खेलते श्रद्धालु जयकारे लगा रहे थे। हर कोई भक्ति भाव से रथयात्रा में नृत्य करते हुए भगवान के सामने प्रगाड श्रद्धा व आस्था की अभिव्यक्ति व्यक्त कर रहे थे। मण्डफिया कस्बे में गुलाब के पत्तो महक से तथा रंग-बिरंगी गुलालो से सडको पर रंगीन चादर बिछ गई। सुबह 11:15 बजे मंदिर में राजभोज आरती सम्पन्न हुई। इसके बाद दोपहर 12 बजे पुजारियों ने भगवान श्रीसांवलिया सेठ की प्रतिमा को गुलाबजल, गंगाजल व तरह-तरह के खुश्बुदार इत्र से स्नान कराया। सबसे बड़ी एकादशी एवं विशेष दिवस होने से भगवान को स्वर्ण वागा धारण करवाया, जिसके दर्शन व झलक पा कर हर कोई अपने आप को धन्य समझ रहा था। पूजारी ने भगवान के बाल स्वरूप को सिंहासन पर बिराजमान कर गुलाल-अबीर लगाई तथा इसके बाद गर्भगृह में बेवाण पर लाए जा रहे थे तो मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं ने भगवान का पुष्प वर्षा व गुलाल उडा कर उनकी आगवानी की। यहां पर भगवान के बाल विग्रह को पुजारी ने रजत बेवाण में स्थापित कराया तो मंदिर परिसर हाथी घोडा पालकी, जय कन्हैयालाल के जयघोष से गुंजायमान हो गया। भक्तों ने भगवान के साथ जमकर फाग खेली। मंदिर परिसर में ही थाली व मांदल की थाप पर श्रद्धालुओं ने जमकर नृत्य किया। दोपहर 2 बजे पूरे मंदिर परिसर का एक भाग श्रद्धालुओं से भर गया तथा कहीं भी पैर रखने की जगह नहीं थी। मंदिर में दक्षिणी द्वार की तरफ से होते हुए रथयात्रा सांवलिया सरोवर स्नान लिए रवाना हुई। श्रद्धालु शोभायात्रा के पूरे मार्ग में खड़े होकर भगवान की राह देख रहे थे। भगवान का रजत रथ खींचने के लिए भक्तों में होड़ रही। मंदिर परिसर में ही कूरेठा नाका मंदिर की रेवाडी भी इस शोभायात्रा में सम्मिलित हो गई। भगवान का रथ राधा कृष्ण मंदिर पहुंचा तो वहां इस मंदिर की रेवाडी शामिल हो गई। रथ यात्रा कबूतर खाना होते हुए श्री सांवलिया घाट एनिकट पहुंची, यहां भगवान के साथ हजारो भक्तों ने सरोवर में पवित्र स्नान किया। इसके बाद भगवान की आधे घंटे की महा आरती की गई। बाद में रजत रथ व शोभायात्र रात आठ बजे पुन: मंदिर पहुंची।

रथयात्रा पर हेलिकॉप्टर से पुष्पवर्षा-
रथयात्रा पर हेलिकॉप्टर से पुष्पवर्षा आकर्षण का केन्द्र रही। रथयात्रा से पहले जब मंदिर से बेवाण बाहर नहीं निकला था तब तक अच्छी बरसात हो रही थी। बेवाण मंदिर से बाहर निकलते ही बारिश थम गई। हेलीकॉप्टर द्वारा की गई पुष्प वृष्टि के दौरान भी बरसात बंद रही।दोपहर १२.१५ बजे हेलीकॉप्टर ने पहला फेरा लगाकर पुष्प वृष्टि की तो हर किसी की नजर आसमान की ओर लग गई। हेलीकॉप्टर ने चार चक्कर लगाकर भगवान के रथ पर पुष्प वर्षा की। मंदिर पदाधिकारीसुरेश बागरिया निवासी नरधारी ने हेलीकॉप्टर से भगवान के रथ पर पुष्प वर्षा की।
बारिश पर भारी दिखी आस्था-
भगवान के बाल स्वरूप को जैसे ही गर्भगृह में लाया गया, इसी दौरान बाहर तेज वर्षा हो गई, जिसमें हजारों श्रद्धालु भगवान के बाहर आने का इंतजार कर रहे थे। आधे घंटे श्रद्धालु तेज वर्षा में भीगते हुए भगवान का इंतजार करते रहे। जैसे ही भगवान बाहर आए तो वर्षा भी बंद हो गई।पूरा मंदिर पानी से भिग गया तथा तलाईयां का रूप ले लिया। रथ यात्रा मंदिर चौक में पहुंची इस दौरान बरसात का पानी मंदिर परिसर में भर गया था।
खुब उड़ेे पुष्प व गुलाल-
मंदिर परिसर में तो भक्तो ने भगवान के संग जमकर फाग खेली। रथ यात्रा मार्ग पर भी श्रद्धालुओं ने जम कर फाग खेली, इसमें 21 क्विंटल गुलाल की होली खेली। मेले में बहुत ही कम श्रद्धालु ऐसे बचे जो गुलाल से नहीं रंगे गए हो। रथ यात्रा के स्वागत के लिए जगह-जगह उंचे स्थानों व घरों की छतो से पुष्पवृष्टि की गई।करीब ३० क्विंटल गुलाब की पंखुडिय़ा उपयोग में ली गई। रथ यात्रा मार्ग गुलाब के फुलो की सुगंध से महक उठा वहीं सडके गुलाल से रंगीन हो गई।

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