महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा हमारी नैतिक जिम्मेदारी- ममता भूपेष

जयपुर। नारी का सम्मान करना भारतीय संस्कृति की पहचान है लेकिन कई दषकों से पाष्चात्य संस्कृति के प्रभाव से देष की छवि पर विपरीत असर पड़ा है। महिलाओं और लड़कियों को समाज में हीन-भावना की दृष्टि से देखा जाता है। हालांकि समाज में बदलाव भी होने लगा है, लेकिन इस दिषा में और अधिक प्रयास करने की जरूरत है, ऐसा कहना है महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती ममता भूपेष का। शुक्रवार 11 जनवरी, 2019 को एस.एस.जैन सुबोध स्नातकोत्तर (स्वायत्तषासी) महाविद्यालय में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन हुआ।

संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि श्रीमती ममता भूपेष ने कहा कि समाज में भ्रूण हत्या एक अभिषाप है ऐसे में लोगों को सकारात्मक जागरूकता प्रसारित करने की आवष्यकता है। उन्होंने बताया कि हमें एक फिल्म की तरह ही माउथ पब्लिसिटी के माध्यम से लोगों को भ्रूण हत्या के प्रति जागरूक करना होगा। लड़के एवं लड़की के बीच लिंग भेद को लेकर समाज में अग्रिम पंक्ति में बैठे लोगों को चेतना जरूरी है। इस मौके पर कार्यक्रम की विषिष्ट अतिथि लखनऊ के स्टडी हाॅल की अध्यक्ष उर्वषी साहनी ने कहा कि देष ही नहीं अपितु पूरे विष्व में बेटियाँ असुरक्षित है, ऐसे में महिलाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी का निर्वहन हमें घर से ही करना होगा, ताकि बच्चों में जन्म से ही समानता का भाव विकसित हो।

सुबोध षिक्षा समिति के अध्यक्ष नवरत्न कोठारी ने महिलाओं को ईष्वर की उत्कृष्ट रचना बताते हुए कहा कि महिला जननी है। वह सृष्टि की रचयिता है। हमारा दायित्व है कि हम उन्हें प्रोत्साहित कर राष्ट्र को आगे बढ़ाएं। उद्घाटन सत्र की मुख्य वक्ता जे.एन.यू., नई दिल्ली के समाजषास्त्र विभाग की प्रो. मैत्रेयी चैधरी ने लैंगिक असमानता को दूर कर समाज में महिलाओं की सषक्त भूमिका पर बल दिया। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. के.बी. शर्मा ने सभी आगन्तुक अतिथियों का पुष्प-गुच्छ देकर स्वागत किया और अपने उद्बोधन में कहा कि भारत में बेटियों, बहनों और माताओं को उच्च सम्मान देना होगा। साथ ही उन्होंने महाविद्यालय की समस्त शैक्षणिक-सहशैक्षणिक रूपरेखा प्रस्तुत की। कार्यक्रम में राष्ट्रीय संगोष्ठी की संयोजिका डा. रंजीता सिंह ने संगोष्ठी की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस संगोष्ठी में चार तकनीकी सत्रों का आयोजन किया जा रहा है। संगोष्ठी में देषभर से 100 से अधिक शोध-पत्र विभिन्न विषय विषेषज्ञों के द्वारा प्रस्तुत किये जायेंगे। इस अवसर पर संगोष्ठी की आयोजन सचिव डाॅ. अनन्तविजया सोनी ने सभी का आभार प्रकट किया।

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